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धान खरीदी में बड़ा खेल! एक प्रबंधक के तीन केंद्रों से 81 लाख की अनियमितता उजागर

कवर्धा। कबीरधाम जिले की धान खरीदी व्यवस्था में सामने आ रही अनियमितताएं अब केवल खरीदी केंद्रों तक सीमित नहीं दिख रही हैं। एक के बाद एक खुलासों ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की खरीदी प्रक्रिया में निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी इतने लंबे समय तक कैसे अनजान बने रहे।

बम्हनी (समनापुर) केंद्र में 77.26 लाख रुपये की गड़बड़ी के बाद अब सहसपुर लोहारा, बासिनझोरी और बिरनपुर कला धान खरीदी केंद्रों में 81.19 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है। संयुक्त जांच के बाद छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है, लेकिन जांच की दिशा अब उन अधिकारियों की जवाबदेही की ओर भी मुड़ रही है जिन पर पूरी व्यवस्था की निगरानी का दायित्व था।

जांच में सामने आया कि तीनों खरीदी केंद्रों का संचालन एक ही समिति प्रबंधक के अधीन था। भौतिक सत्यापन में 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 खाली बारदाने कम मिले, जिससे शासन को 81 लाख 19 हजार 502 रुपये की आर्थिक क्षति का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि कई तौल पत्रकों पर केवल किसानों के हस्ताक्षर थे, जबकि खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौलकों के हस्ताक्षर वाले कॉलम खाली मिले। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही या सुनियोजित अनियमितता हुई।

तीनों केंद्रों में दर्ज कमी इस प्रकार है—

– बासिनझोरी: 585.98 क्विंटल धान और 4,130 बारदाने कम।
– बिरनपुर कला: 1,032.36 क्विंटल धान और 5,777 बारदाने कम।
– सहसपुर लोहारा: 823.58 क्विंटल धान और 12,075 बारदाने कम।

पुलिस ने समिति प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इधर, युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने दावा किया है कि जिले में 54 हजार क्विंटल से अधिक धान का हिसाब अभी भी बाकी है और यदि सभी संग्रहण केंद्रों व राइस मिलों का भौतिक सत्यापन सार्वजनिक किया जाए तो अनियमितताओं का आंकड़ा 60 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब धान खरीदी की ऑनलाइन निगरानी, नियमित निरीक्षण और स्टॉक सत्यापन की व्यवस्था पहले से मौजूद थी, तब इतनी बड़ी गड़बड़ियां आखिर किसकी नजरों से ओझल रहीं? जांच आगे बढ़ने के साथ अब जिम्मेदारी केवल खरीदी केंद्रों तक सीमित रहेगी या निगरानी करने वाले अधिकारियों तक भी पहुंचेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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