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लापरवाही की इंतहा: धान खरीदी सत्र 2024-25 में दो संग्रहण केंद्रों से 27,670 क्विंटल धान गायब, 9 महीने बाद भी जांच अधूरी


जिला खाद्य शाखा, जिला विपणन विभाग और धान खरीदी से जुड़े नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति रिपोर्ट तैयार करने में बरती लापरवाही

कवर्धा : कलेक्टर ने दिए थे जांच के आदेश,अफसरों ने उड़ाई धज्जियां धान खरीदी सत्र 2024-25 में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों बाजारा चारभाठा और बघर्रा से करोड़ों रुपये मूल्य के धान गायब होने का मामला युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने सुचना के अधिकार से निकाले दस्तावेज लगभग 8.5 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले का खुलासा हुए नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन संयुक्त जांच टीम अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। जांच की धीमी रफ्तार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के अभाव ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।यह मामला और भी हैरान करने वाला इसलिए बन गया है क्योंकि करोड़ों रुपये के धान घोटाले में निलंबित किए गए तत्कालीन धान खरीदी प्रभारी को चुपचाप बहाल कर दिया गया है। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बावजूद न तो अब तक सरकारी राशि की वसूली हो सकी है और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इससे जिला प्रशासन, विपणन विभाग और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सितंबर 2025 में शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर ने जिला खाद्य शाखा, पंजीयक विभाग और धान खरीदी के नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की थी। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले के जिम्मेदारों पर जल्द कार्रवाई होगी और दोषी सलाखों के पीछे पहुंचेंगे। लेकिन नौ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। अब मामले को उलझाने और कार्रवाई टालने के लिए तकनीकी कारणों और प्रक्रियागत बहानों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे पूरे मामले पर पर्दा डालने की आशंका और गहरा गई है।

करोड़ों के धान की कमी उजागर, फिर भी प्रभारियों पर नहीं गिरी गाज

धान खरीदी सत्र 2024-25 में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों में कुल 8 लाख 3 हजार 528 क्विंटल धान संग्रहित था। बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र में संग्रहित 6 लाख 46 हजार 486 क्विंटल धान के विरुद्ध 22 हजार 997 क्विंटल धान कम पाया गया, जो लगभग 3.56 प्रतिशत की कमी है। वहीं बघर्रा संग्रहण केंद्र में संग्रहित 1 लाख 57 हजार 42 क्विंटल धान के मुकाबले 4 हजार 673  क्विंटल धान की कमी पाई गई, जो लगभग 3.0 प्रतिशत है। हैरानी की बात यह है कि बाजार चारभाठा केंद्र में इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी मिलने पर केंद्र प्रभारी को निलंबित तो किया गया, लेकिन बाद में उन्हें पुनः बहाल कर दिया गया। दूसरी ओर बघर्रा केंद्र के प्रभारी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं, वर्ष 2025-26 के धान संग्रहण का कार्य भी उसी प्रभारी के माध्यम से कराया गया। करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होना और संबंधित प्रभारियों को संरक्षण मिलना पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


जिले में करोड़ों रुपये का धान खरीदी में महाघोटाला  – आकाश केशरवानी

युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि धान खरीदी सत्र 2024–25 में मार्कफेड की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार जिले के सभी उपार्जन केंद्रों के उठाव के बाद भी 46,360 क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई, जिसका मूल्य लगभग 14 करोड़ 37 लाख रुपये से अधिक है।
बाजार चारभाठा एवं बघर्रा संग्रहण केंद्रों में 27,670 क्विंटल धान की कमी दर्ज हुई, जिसकी कीमत लगभग 8.5 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं धान खरीदी सत्र 2025–26 में भी जिले के सभी उपार्जन केंद्रों के उठाव के बाद मार्कफेड की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार करीब 52 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आई है, जिसका अनुमानित मूल्य 16 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। बड़ी समितियों पर कार्यवाही न करके उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार एवं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जिले में करोड़ों रुपये का धान महाघोटाला होने का आरोप लगाया गया है।

करोड़ों के धान गायब, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं; चूहों-दीमक और मौसम पर फोड़ा गया ठीकरा

धान खरीदी सत्र 2024-25 में सामने आए करोड़ों रुपये के धान शॉर्टेज मामले में कार्रवाई और जांच की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विवादित बयान देने पर राज्य सरकार ने तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था, लेकिन जिस अवधि में धान की खरीदी और संग्रहण हुआ, उस समय जिले में जिला विपणन अधिकारी के रूप में किशोर चंद्रा पदस्थ थे। मामले में यह भी आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी के बावजूद वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। धान की कमी को लेकर चूहों, दीमक, कीटों और मौसम जैसी वजहों को जिम्मेदार बताने वाले बयानों ने पूरे मामले को और विवादित बना दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जिला खाद्य शाखा,  विपणन विभाग और धान खरीदी से जुड़े नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच समिति अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी है। घटना के कई महीने बीत जाने के बावजूद जांच लंबित रहने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में करोड़ों रुपये के धान शॉर्टेज के इस मामले में दोषियों की जवाबदेही तय करने, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।ती लापरवाही

कवर्धा : कलेक्टर ने दिए थे जांच के आदेश,अफसरों ने उड़ाई धज्जियां धान खरीदी सत्र 2024-25 में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों बाजारा चारभाठा और बघर्रा से करोड़ों रुपये मूल्य के धान गायब होने का मामला युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने सुचना के अधिकार से निकाले दस्तावेज लगभग 8.5 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले का खुलासा हुए नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन संयुक्त जांच टीम अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। जांच की धीमी रफ्तार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के अभाव ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।यह मामला और भी हैरान करने वाला इसलिए बन गया है क्योंकि करोड़ों रुपये के धान घोटाले में निलंबित किए गए तत्कालीन धान खरीदी प्रभारी को चुपचाप बहाल कर दिया गया है। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बावजूद न तो अब तक सरकारी राशि की वसूली हो सकी है और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इससे जिला प्रशासन, विपणन विभाग और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सितंबर 2025 में शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर ने जिला खाद्य शाखा, पंजीयक विभाग और धान खरीदी के नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की थी। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले के जिम्मेदारों पर जल्द कार्रवाई होगी और दोषी सलाखों के पीछे पहुंचेंगे। लेकिन नौ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। अब मामले को उलझाने और कार्रवाई टालने के लिए तकनीकी कारणों और प्रक्रियागत बहानों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे पूरे मामले पर पर्दा डालने की आशंका और गहरा गई है।

करोड़ों के धान की कमी उजागर, फिर भी प्रभारियों पर नहीं गिरी गाज

धान खरीदी सत्र 2024-25 में जिले के दो प्रमुख संग्रहण केंद्रों में कुल 8 लाख 3 हजार 528 क्विंटल धान संग्रहित था। बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र में संग्रहित 6 लाख 46 हजार 486 क्विंटल धान के विरुद्ध 22 हजार 997 क्विंटल धान कम पाया गया, जो लगभग 3.56 प्रतिशत की कमी है। वहीं बघर्रा संग्रहण केंद्र में संग्रहित 1 लाख 57 हजार 42 क्विंटल धान के मुकाबले 4 हजार 673  क्विंटल धान की कमी पाई गई, जो लगभग 3.0 प्रतिशत है। हैरानी की बात यह है कि बाजार चारभाठा केंद्र में इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी मिलने पर केंद्र प्रभारी को निलंबित तो किया गया, लेकिन बाद में उन्हें पुनः बहाल कर दिया गया। दूसरी ओर बघर्रा केंद्र के प्रभारी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं, वर्ष 2025-26 के धान संग्रहण का कार्य भी उसी प्रभारी के माध्यम से कराया गया। करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होना और संबंधित प्रभारियों को संरक्षण मिलना पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


जिले में करोड़ों रुपये का धान खरीदी में महाघोटाला  – आकाश केशरवानी

युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि धान खरीदी सत्र 2024–25 में मार्कफेड की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार जिले के सभी उपार्जन केंद्रों के उठाव के बाद भी 46,360 क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई, जिसका मूल्य लगभग 14 करोड़ 37 लाख रुपये से अधिक है।
बाजार चारभाठा एवं बघर्रा संग्रहण केंद्रों में 27,670 क्विंटल धान की कमी दर्ज हुई, जिसकी कीमत लगभग 8.5 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं धान खरीदी सत्र 2025–26 में भी जिले के सभी उपार्जन केंद्रों के उठाव के बाद मार्कफेड की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार करीब 52 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आई है, जिसका अनुमानित मूल्य 16 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। बड़ी समितियों पर कार्यवाही न करके उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार एवं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जिले में करोड़ों रुपये का धान महाघोटाला होने का आरोप लगाया गया है।

करोड़ों के धान गायब, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं; चूहों-दीमक और मौसम पर फोड़ा गया ठीकरा

धान खरीदी सत्र 2024-25 में सामने आए करोड़ों रुपये के धान शॉर्टेज मामले में कार्रवाई और जांच की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विवादित बयान देने पर राज्य सरकार ने तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था, लेकिन जिस अवधि में धान की खरीदी और संग्रहण हुआ, उस समय जिले में जिला विपणन अधिकारी के रूप में किशोर चंद्रा पदस्थ थे। मामले में यह भी आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी के बावजूद वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। धान की कमी को लेकर चूहों, दीमक, कीटों और मौसम जैसी वजहों को जिम्मेदार बताने वाले बयानों ने पूरे मामले को और विवादित बना दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जिला खाद्य शाखा,  विपणन विभाग और धान खरीदी से जुड़े नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच समिति अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी है। घटना के कई महीने बीत जाने के बावजूद जांच लंबित रहने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में करोड़ों रुपये के धान शॉर्टेज के इस मामले में दोषियों की जवाबदेही तय करने, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।

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