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धान खरीदी घोटाले की परतें खुलनी शुरू 81 लाख की कथित गड़बड़ी के बीच फरार प्रबंधक के घर से 16 लाख नकद, अब बड़े संरक्षण पर उठ रहे सवाल

कवर्धा। कबीरधाम जिले की धान खरीदी व्यवस्था में सामने आए कथित घोटाले की जांच अब लगातार नए खुलासे कर रही है। सहसपुर लोहारा, बासिनझोरी और बिरनपुर कला धान उपार्जन केंद्रों में 81.19 लाख रुपये की कथित आर्थिक गड़बड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी गंगादास मानिकपुरी (पिता– विश्राम दास), उम्र लगभग 58 वर्ष, निवासी उड़िया खुर्द के घर पर छापा मारा।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान आरोपी अपने घर पर नहीं मिला और फरार पाया गया। तलाशी के दौरान घर से लगभग 16 लाख रुपये नकद, विभिन्न बैंकों की पासबुक तथा बैंक खातों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इन सभी दस्तावेजों को जब्त कर जांच में शामिल कर लिया है। वहीं, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापामार कार्रवाई लगातार जारी है।

मामला केवल नकदी की बरामदगी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि धान उपार्जन केंद्रों में इतनी बड़ी कथित अनियमितता हुई, तो निगरानी और निरीक्षण करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली? धान खरीदी, भंडारण और रिकॉर्ड के सत्यापन की पूरी व्यवस्था होने के बावजूद कथित रूप से लाखों रुपये की गड़बड़ी आखिर कैसे होती रही?

पुलिस ने इस मामले में समिति प्रबंधक, फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं। हालांकि, धान खरीदी जैसी बहुस्तरीय व्यवस्था में केवल कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खत्म नहीं होते। जानकारों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से की जाती है तो इस पूरे प्रकरण में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

आरोपी के घर से बड़ी मात्रा में नकदी और बैंक दस्तावेज मिलने के बाद अब यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि यह रकम किस स्रोत से आई और क्या इसका संबंध धान खरीदी में हुई कथित गड़बड़ियों से है। यदि वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की विस्तार से जांच होती है, तो कई और अहम तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अब जिले की जनता की नजर इस बात पर है कि जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या फिर पूरे धान खरीदी तंत्र में कथित अनियमितताओं और संभावित संरक्षण देने वाले जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी उजागर कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।

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