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कबीरधाम जिला में DMF में बड़ा खेल? 15–20% लेकर करोड़ों के निर्माण कार्य जारी – आकाश केशरवानी



उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा  के लिए राशि जारी नहीं की गई,भौतिक अधोसंरचना के कार्यो के लिए राशि जारी

कबीरधाम। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) फंड का उपयोग कबीरधाम जिले में अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले की चारों जनपद पंचायतों—कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा—में लगभग 22 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इस राशि से लगभग 158 से 165  कार्य स्वीकृत किए गए लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश कार्य सड़क और पुलिया निर्माण जैसे भौतिक अधोसंरचना से जुड़े हैं। जबकि नियम स्पष्ट कहते हैं कि डीएमएफ फंड की 60 प्रतिशत राशि पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, कौशल विकास और स्वच्छता जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर खर्च की जानी चाहिए।

लेकिन जिले में इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए महज 5 प्रतिशत राशि स्वीकृत होना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या खनन प्रभावित ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतें अब प्राथमिकता नहीं रही  40 प्रतिशत श्रेणी वाले कार्यों में लगभग पूरी राशि झोंक दी गई है। आखिर ऐसा क्यों? क्या नियमों को दरकिनार कर फंड का मनमाना उपयोग किया जा रहा है सबसे ज्यादा स्वीकृति बोड़ला जनपद पंचायत में लगभग 13.42 करोड़ रुपये की बताई जा रही है, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाती है। खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी लोग स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 


जिला खनिज न्यास (जिला खनिज न्यास – DMF) से संचालित निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं एवं गुणवत्ताहीन कार्यों को लेकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई।

प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया कि DMF मद से कराए जा रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। कई स्थानों पर कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। आरोप है कि कार्य पूर्ण होने के बाद औपचारिकता निभाने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जो सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कार्य पंचायतों के माध्यम से कराए जाने थे, किन्तु पंचायतों में कार्य देकर कार्य बाहरी ठेकेदारों के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि एक सिंडिकेट बनाकर पूरे कार्यों को नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

जिला खनिज संस्थान न्यास की दिनांक 27.05.2025 की बैठक में लगभग 27 करोड़ रुपये की अनुमानित कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें विभिन्न भौतिक अधोसंरचना के कार्य शामिल थे। लेकिन जिन कार्यों को प्राथमिकता दी गई, उनमें गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं, जैसे रोल चेकडेम के पास पुलिया निर्माण कार्य , किसानटोला सरस रद्दा में पुलिया निर्माण कार्य ,  चौरा भोरमदेव में चेकडेम निर्माण कार्य , कोमो/मुडघुसरी जंगल में पुलिया निर्माण कार्य , कोटनानाला चेन्द्रादार में आर.सी.सी. पुलिया निर्माण कार्य , इन कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी, लागत में अनियमितता और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट दिखाई दे रही है।

सबसे गंभीर बात यह है कि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों — पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा — के लिए राशि जारी नहीं की गई, जबकि इन बुनियादी आवश्यकताओं की जिले में अत्यंत जरूरत है। यह स्थिति जिला खनिज संस्थान न्यास के उद्देश्य के विपरीत है और स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है । जनता के हितों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के कार्यों में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगा । संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई  करने की मांग किया गया है ।

ज्ञापन के दौरान अमित वर्मा , विष्णु नेताम , नरेंद्र वर्मा , ओमकलेस्वर कौशिक , हेमराज कौशिक , नरेश साहू ,रामसजीवन धुर्वे, अनिल सिन्हा, बाबुलाल साहू , तुसार वर्मा ,
भूपेंद्र ठाकूर, कोमल साहू शामिल रहे ।

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