Blog

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कवर्धा छात्रावास में गहराया संकट: भूख, भय और बदइंतजामी के बीच पढ़ने को मजबूर बेटियां


कवर्धा। शहर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में अव्यवस्थाओं का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ छात्रावास प्रबंधन बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बेटियों की सुरक्षा और पोषण के दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बताई जा रही है।
छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास में परोसा जा रहा भोजन निम्नस्तरीय और कई बार खराब होता है। बजट की कमी का हवाला देकर खाने में कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें अधपेट रहना पड़ता है। कुछ छात्राओं के बीमार पड़ने की बात भी सामने आई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो बच्चियों का स्वास्थ्य और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
गंभीर आरोप यह भी हैं कि छात्रावास में आवश्यक दैनिक उपयोग की सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही। शिकायत करने पर छात्राओं को चुप रहने की सलाह दी जाती है और दबाव बनाया जाता है। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोपों ने माहौल को और भयावह बना दिया है। छात्राएं दहशत के साये में रहने को मजबूर बताई जा रही हैं।
मामले में जब जिला प्रशासन से बात की गई तो जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि हालात इतने दिनों से बिगड़े हुए थे तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
अधीक्षिका ने आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि यदि सब कुछ सही है तो फिर इतनी बड़ी संख्या में शिकायत क्यों की गई? अब निगाहें जिला कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
सवाल बड़ा है  क्या बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सिर्फ कागजी दावों तक सीमित है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button