भय ने 8 साल तक दबाए रखा सच, 2025 में टूटी चुप्पी कबीरधाम पुलिस ने सुलझाया किशोरी हत्याकांड
कबीरधाम जिले में आठ वर्षों से दबी एक सच्चाई आखिरकार सामने आ ही गई। वर्ष 2017 में रहस्यमय हालात में मृत मिली 14 वर्षीय किशोरी के मामले में वह मोड़ आया, जिसने अंधे कत्ल की परतें खोल दीं। डर के साये में जी रहा एक गवाह, जिसने वर्षों तक कुछ नहीं कहा, 2025 में सामने आया और उसी बयान ने हत्या की पूरी कहानी उजागर कर दी।
थाना कुकदूर क्षेत्र के ग्राम अमनिया में किशोरी का शव पेड़ से लटका मिला था। उस समय इसे आत्महत्या का मामला समझा गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। बावजूद इसके, ठोस साक्ष्य के अभाव में मामला वर्षों तक फाइलों में दबा रहा।
वर्ष 2025 में कबीरधाम पुलिस द्वारा पुराने अनसुलझे अपराधों की समीक्षा के दौरान इस केस को दोबारा खोला गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने गांवों में खामोशी से निगरानी बढ़ाई, पुराने संपर्कों को खंगाला और संदेह के दायरे में आए लोगों पर लगातार नजर रखी। इसी क्रम में एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि वह घटना का प्रत्यक्ष गवाह है, लेकिन जान के डर से अब तक चुप था।
न्यायालय में दर्ज बयान और तकनीकी विवेचना के बाद पुलिस ने दो आरोपियों की भूमिका स्पष्ट की। जांच में सामने आया कि किशोरी की हत्या गला दबाकर की गई थी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को फांसी पर लटकाया गया था, ताकि मामला आत्महत्या प्रतीत हो।
आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही यह केस न केवल सुलझा, बल्कि यह भी साबित हुआ कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, अपराध अपने निशान छोड़ ही जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला उन गवाहों के लिए भी संदेश है, जो भयवश सच छिपाए रहते हैं — कानून अंततः उन्हें सुरक्षा और न्याय दोनों देता है।
कबीरधाम पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि अंधे कत्ल केवल समय की धूल में छिपते हैं, समाप्त नहीं होते। सही रणनीति, धैर्य और सतत निगरानी से वर्षों पुराने रहस्य भी उजागर किए जा सकते हैं।




