कवर्धा जिले में आवास योजना की दूसरी किस्त में देरी से हितग्राही परेशान
उधारी में खरीदी निर्माण सामग्री, कर्ज के बोझ तले दबे ग्रामीण; जनपद कार्यालय का जवाब “सरकार डालेगी तब आएगा पैसा”

कवर्धा। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत मकानों के निर्माण में दूसरी किस्त की देरी ने हितग्राहियों की परेशानी बढ़ा दी है। पहली किस्त मिलने के बाद कई परिवारों ने मकान निर्माण शुरू कर दिया। रेत, गिट्टी, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री उधारी में खरीद ली गई, इस उम्मीद के साथ कि दूसरी किस्त समय पर खाते में आ जाएगी।
लेकिन दूसरी किस्त के भुगतान में हो रही देरी ने गरीब परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और उधारी देने वाले दुकानदार लगातार तकादा कर रहे हैं। कई परिवारों को मजबूरी में निजी साहूकारों से ब्याज पर रकम उठानी पड़ रही है, जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ता जा रहा है।
“दूसरी किस्त कब आएगी, कोई स्पष्ट जवाब नहीं”
हितग्राहियों का कहना है कि जब वे जनपद कार्यालय पहुंचकर दूसरी किस्त के बारे में जानकारी लेते हैं, तो उन्हें यही जवाब मिलता है — “सरकार पैसा डालेगी तब आपके खाते में आएगा, कब आएगा इसकी जानकारी नहीं है।”
अधिकारियों की इस अनिश्चितता भरी प्रतिक्रिया से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि किस्त समय पर नहीं दी जानी थी, तो निर्माण शुरू करने का दबाव क्यों बनाया गया।
अधूरे मकान, बढ़ती चिंता
गांवों में कई ऐसे मकान दिखाई दे रहे हैं जिनकी दीवारें आधी बनी हैं या छत डालने का काम रुका हुआ है। बरसात और मौसम की मार से अधूरा निर्माण खराब होने की आशंका भी बढ़ रही है। हितग्राही बताते हैं कि समय पर राशि न मिलने से मजदूरों का भुगतान भी अटक गया है, जिससे काम पूरी तरह ठप हो चुका है।
प्रशासन की चुप्पी
इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट समयसीमा या लिखित सूचना जारी नहीं की गई है। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन भुगतान में देरी ने इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से मांग की है कि दूसरी किस्त जल्द जारी की जाए और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही, किस्त वितरण में हो रही देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में हितग्राहियों को इस प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब तक इस समस्या का समाधान करता है और गरीब परिवारों को राहत मिलती है।




