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गरीबों को अधूरा मकान, नेताओं को पक्का मंच प्राथमिकता पर बड़ा सवाल मंच बड़ा या मकान जनता के आवास से ज्यादा प्राथमिकता मंच को


कवर्धा,छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक ओर जहां आम गरीब परिवारों को आवास योजना के तहत करीब 1.50 लाख रुपये की राशि दी जाती है, वहीं दूसरी ओर गांवों में मंच निर्माण के लिए 3 लाख रुपये तक की स्वीकृति दी जा रही है।
सवाल यह उठता है कि क्या सरकार की प्राथमिकता गरीबों का पक्का घर है या फिर राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए बनने वाले मंच?
ग्रामीणों का कहना है कि 1.50 लाख रुपये में आज के समय में एक सुरक्षित और मजबूत मकान बनाना लगभग असंभव है। महंगाई, निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत और मजदूरी दर को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं मानी जा रही। वहीं, मंच निर्माण के लिए दोगुनी राशि स्वीकृत होना आम जनता के बीच असंतोष का कारण बन रहा है।
जनता के सवाल:
क्या सरकार के लिए मंच की जरूरत, गरीब के घर से ज्यादा अहम है?
क्या आवास योजना की राशि बढ़ाने की जरूरत नहीं है?
क्या यह प्राथमिकताओं का असंतुलन नहीं दर्शाता?
ग्रामीणों का आरोप है कि मंचों का उपयोग अधिकतर राजनीतिक आयोजनों में होता है, जबकि गरीब परिवार सालों से पक्के घर के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यदि सरकार वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, तो आवास योजना की राशि को बढ़ाकर वास्तविक निर्माण लागत के अनुरूप करना चाहिए, न कि मंचों पर ज्यादा खर्च कर प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करने चाहिए।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं, या फिर यह सवाल यूं ही हवा में तैरता रहेगा।

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