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कवर्धा में फिर प्रतिमा खंडित, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


कवर्धा। जिला मुख्यालय स्थित रेवाबंद तालाब में स्थापित भगवान शनिदेव और हनुमान जी की प्रतिमाओं के साथ तोड़फोड़ की घटना ने एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। लगातार धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने से आम नागरिकों में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
रविवार सुबह जब श्रद्धालु नियमित पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे, तब उन्होंने देखा कि शनिदेव की प्रतिमा खंडित अवस्था में पड़ी है, वहीं हनुमान जी की प्रतिमा को स्थान से उखाड़कर तालाब में फेंक दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में भीड़ एकत्रित हो गई और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
बार-बार हो रही घटनाएं, कार्रवाई कब?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। जिले में मंदिरों और देवस्थलों में तोड़फोड़, चोरी और असामाजिक गतिविधियों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी और ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन
घटना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। विरोध स्वरूप नारेबाजी और पुतला दहन भी किया गया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी नवीन जायसवाल, अशोक सिंह (अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी कवर्धा), मणीशंकर त्रिपाठी (अध्यक्ष कवर्धा ग्रामीण), पदुम सेन (सेवा दल), नारायणी टोन्ड्रे (शहर अध्यक्ष महिला कांग्रेस), आकाश केशरवानी, गोपाल चंद्रवंशी, अमन वर्मा, सूरज वर्मा, शितेश चंद्रवंशी, नरेंद्र वर्मा, तुषार वर्मा, धनेश पाली, आनंद, रामायण सिन्हा, दीपक ठाकुर, मिलन तिवारी, सुरेश वर्मा, प्रवीण वैष्णव सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रशासन की चुप्पी
घटना के बाद अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाएगा? यदि शीघ्र और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश और बढ़ सकता है।

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