कबीरधाम: सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात, आदिवासी समाज सड़कों पर; 24 घंटे में गिरफ्तारी और बुलडोजर चलाने की मांग
कबीरधाम जिले में एक आदिवासी युवती के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात ने पूरे आदिवासी समाज को आंदोलित कर दिया है। इस शर्मनाक घटना को लेकर समाज ने आज, गुरुवार को, सीधे राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रमुखों को एक अत्यंत गंभीर ज्ञापन सौंपा है, जिसमें त्वरित कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
देर रात हुई वारदात, अब तक आरोपी फरार
ज्ञापन के अनुसार, यह वीभत्स घटना बुधवार, 24 सितंबर 2025, की रात लगभग 3 बजे हुई। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह वारदात न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि “पूरे जिले और समाज के लिए शर्मनाक” है। समाज का आरोप है कि घटना को 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, पुलिस न तो आरोपियों का कोई सुराग लगा पाई है और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया है। इस ढिलाई से आक्रोशित समाज ने अब खुद मोर्चा संभाल लिया है।
शासन को सौंपा गया कड़ा अल्टीमेटम
आदिवासी समाज ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, और कबीरधाम जिलाधीश सहित कई शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए चार अत्यंत कठोर और तत्काल लागू करने योग्य मांगें रखी हैं:
1. 24 घंटे में गिरफ्तारी:
समाज की पहली और सबसे प्रमुख मांग है कि सभी आरोपियों को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद 24 घंटे की समय-सीमा के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
2. बुलडोजर कार्रवाई की मांग:
पीड़िता को तत्काल न्याय दिलाने के लिए समाज ने कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ एक सख्त कदम की मांग की है। उनकी मांग है कि आरोपी पकड़े जाने के तुरंत बाद, उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जाए।
3. 50 लाख का मुआवजा:
समाज ने कहा है कि इस घटना ने उनकी बेटी के साथ-साथ पूरे परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। इसके मुआवजे के तौर पर, पीड़ित परिवार को राज्य सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
4. कबाड़ीपारा मामले में रोक:
ज्ञापन में एक अन्य स्थानीय मुद्दा भी उठाया गया है। समाज ने मांग की है कि कबाड़ीपारा से संबंधित एक मामले में दर्ज FIR के तहत आदिवासियों को उठाकर जेल भेजे जाने की कार्रवाई पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
आदिवासी समाज ने अंत में सख्त शब्दों में कहा है कि यदि उनकी इन मांगों को तत्काल पूरा नहीं किया गया, तो उन्हें न्याय के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह ज्ञापन स्पष्ट रूप से दिखाता है कि समाज इस गंभीर आपराधिक घटना पर प्रशासन की निष्क्रियता को अब और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है।




