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दूसरी बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले पंच कैलाशी पं. राजेश शुक्ला, आस्था, साहस और आध्यात्मिक समर्पण की प्रेरक मिसाल


कवर्धा। भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था और आध्यात्मिक समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जगन्नाथ सेवा समिति के वैचारिक सहयोगी एवं कबीरधाम निवासी पंच कैलाशी पं. राजेश शुक्ला दूसरी बार पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर रवाना हुए हैं। उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को लेकर जिले के श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों में हर्ष और उत्साह का माहौल है। सभी ने उनकी यात्रा की सफलता एवं सकुशल वापसी के लिए भगवान शिव से मंगलकामना की है।

पं. राजेश शुक्ला इससे पहले वर्ष 2023 में उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं। अब वे दूसरी बार सिक्किम के नाथुला दर्रे के मार्ग से चीन में प्रवेश कर भगवान शिव के पवित्र धाम की ओर अग्रसर हैं। एक ही जीवन में दो बार कैलाश मानसरोवर यात्रा का अवसर मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात माना जाता है और इसे भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा का प्रतिफल समझा जाता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा विश्व की सबसे कठिन एवं पवित्र तीर्थयात्राओं में शामिल है। हजारों फीट की ऊँचाई, कठिन पर्वतीय रास्ते, ऑक्सीजन की कमी और बदलते मौसम के बीच श्रद्धालुओं को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद भगवान शिव के दर्शन और मानसरोवर के पवित्र जल के प्रति श्रद्धा श्रद्धालुओं को हर कठिनाई पार करने का आत्मबल प्रदान करती है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि धैर्य, संयम, आत्मविश्वास और तपस्या की भी परीक्षा मानी जाती है।

धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले पं. राजेश शुक्ला को क्षेत्र में श्रद्धापूर्वक “पंच कैलाशी” के नाम से भी जाना जाता है। वे समय-समय पर धार्मिक आयोजनों, सेवा कार्यों और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी दूसरी कैलाश यात्रा अनेक श्रद्धालुओं और युवाओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत मानी जा रही है।

जगन्नाथ सेवा समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, मित्रों एवं जिले के श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की है कि उनकी यह पावन यात्रा पूर्णतः सुरक्षित, मंगलमय और सफल हो। सभी ने कामना की है कि वे कैलाश मानसरोवर के दिव्य दर्शन एवं आध्यात्मिक अनुभूतियों का पुण्य लाभ प्राप्त कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर सकुशल अपने गृह नगर लौटें तथा अपने अनुभवों से समाज में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

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