प्रेस भवन विवाद में सियासी कनेक्शन की चर्चा! प्रकाश वर्मा का भूपेश बघेल को लिफाफा देने का वीडियो वायरल, पहले विजय शर्मा से सिफारिश की चर्चा


कवर्धा में प्रेस भवन विवाद ने पकड़ा तूल, वायरल वीडियो को लेकर उठ रहे सवाल; क्या राजनीतिक दरवाजे खटखटाकर निकाला जा रहा है समाधान
कवर्धा। जिला प्रेस क्लब कवर्धा का प्रेस भवन इन दिनों पत्रकारों की सुविधाओं से ज्यादा विवाद और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। वर्तमान अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर और पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा के बीच जारी विवाद के बीच अब राजनीतिक मुलाकातों से जुड़े वीडियो भी चर्चा में आ गए हैं। पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा का पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक लिफाफा देते हुए वीडियो वायरल होने की बात सामने आई है। वहीं, इससे पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से सिफारिश कराने से जुड़ा वीडियो भी वायरल होने की चर्चा रही है।
इन घटनाक्रमों के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रेस भवन के विवाद का समाधान संगठन के भीतर निकालने के बजाय राजनीतिक नेताओं तक मामला क्यों पहुंच रहा है?
विजय शर्मा से बात नहीं बनी तो भूपेश बघेल तक पहुंचा मामला
प्रेस भवन विवाद को लेकर राजनीतिक स्तर पर संपर्क किए जाने की चर्चाओं ने मामले को और गरमा दिया है। पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से सिफारिश कराने से जुड़े वीडियो की चर्चा हुई और अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिफाफा दिए जाने का वीडियो वायरल होने की बात सामने आ रही है।
हालांकि, वायरल वीडियो में दिए गए लिफाफे के अंदर क्या था, उसमें किस विषय का आवेदन था और मुलाकात का वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इसलिए यह कहना कि एक नेता से बात नहीं बनी तो दूसरे नेता के पास मामला ले जाया गया, फिलहाल जांच और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण का विषय है।
पत्रकारों का भवन या राजनीतिक सिफारिशों का केंद्र
प्रेस भवन का उद्देश्य पत्रकारों को एक साझा मंच और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में सवाल यह है कि भवन के संचालन, अधिकार और पुराने विवादों को लेकर स्पष्ट नियमों के आधार पर समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा? यदि किसी पक्ष को शिकायत है, तो उसे संगठन के रिकॉर्ड, आय-व्यय के विवरण और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर सामने रखना चाहिए।
राजनीतिक नेताओं को आवेदन देना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन यदि विवाद का समाधान केवल सिफारिशों के सहारे तलाशा जा रहा है, तो संगठन की आंतरिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किराये की राशि और पुराने हिसाब पर भी जवाब जरूरी
वर्तमान अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर की ओर से पूर्व में प्रेस भवन की किराये की राशि और हिसाब-किताब को लेकर आरोप लगाए गए हैं। कथित गबन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक होने और दोनों पक्षों का जवाब सामने आने से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सामने आने चाहिए सभी सवालों के जवाब
प्रेस भवन विवाद में वायरल वीडियो, राजनीतिक मुलाकातों और आर्थिक हिसाब-किताब को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब संबंधित पक्षों को तथ्यों के साथ देना चाहिए। वीडियो की पूरी रिकॉर्डिंग, आवेदन की प्रति और भवन से जुड़े दस्तावेज सामने आने से विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है पत्रकारों के लिए बने प्रेस भवन का विवाद आखिर कब खत्म होगा? क्या इसका समाधान पारदर्शी व्यवस्था और दस्तावेजों से निकलेगा या मामला आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक मुलाकातों के बीच उलझा रहेगा? फिलहाल, इन सवालों पर पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।




