₹6 लाख की सीसी रोड निर्माण में मनमानी के आरोप, लाल गिट्टी के बाद अब वाइब्रेटर मशीन का इस्तेमाल नहीं होने पर सवाल


सतनामी पारा में मंडी बोर्ड के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ठेकेदार की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी की जांच की मांग
लोहारा। ग्राम पंचायत ओड़िया कला के सतनामी पारा में मंडी बोर्ड की लगभग 6 लाख रुपये की लागत से बन रही सीसी रोड अब सवालों के घेरे में है। निर्माण कार्य में लाल गिट्टी के इस्तेमाल के बाद अब सीसी रोड निर्माण के दौरान वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किए जाने की बात सामने आई है। यदि मौके पर निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है, तो सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर असर पड़ने की आशंका है।
सरकारी राशि खर्च, लेकिन गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी
सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग, तकनीकी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि लगभग 6 लाख रुपये की लागत से बन रही इस सड़क की निगरानी कौन कर रहा है? क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है? यदि वाइब्रेटर मशीन का उपयोग आवश्यक है, तो इसके बिना निर्माण कार्य कैसे कराया जा रहा है?
विधायक के करीबियों का ठेका या अधिकारियों की अनदेखी
पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ओड़िया कला के सतनामी पारा में चल रहा यह निर्माण कार्य भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या संबंधित ठेकेदार को खुली छूट मिली हुई है, क्या ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं?
विधायक के करीबियों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं, लेकिन ठेकेदार के राजनीतिक संबंधों या भ्रष्टाचार में संलिप्तता की पुष्टि बिना दस्तावेजी साक्ष्य के नहीं की जा सकती। इसलिए संबंधित विभाग को ठेकेदार, कार्यादेश, स्वीकृत राशि और तकनीकी निरीक्षण का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
जांच होगी या ऐसे ही खर्च होगी जनता की राशि
अब मंडी बोर्ड और संबंधित अधिकारियों से मांग है कि निर्माण कार्य का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। उपयोग की जा रही सामग्री, सीसी रोड की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्धारित निर्माण प्रक्रिया की जांच हो। यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता के टैक्स की राशि से बनने वाली सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित कौन करेगा? ग्रामीणों को मजबूत सड़क चाहिए, केवल निर्माण पूरा होने का दावा नहीं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में जांच कर कार्रवाई करता है या निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवाल अनुत्तरित ही रह जाते हैं।



