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कुम्हार समाज की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, 40 परिवारों की आजीविका पर मंडराया संकट



कवर्धा, 02 जून। कबीरधाम जिले के ग्राम कोदवागोड़ान, तहसील पंडरिया में कुम्हार समाज की वर्षों पुरानी उपयोग की जा रही भूमि पर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला कुम्हकार समाज के जिला अध्यक्ष सुदर्शन कुंभकार के नेतृत्व में समाजजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। समाज का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो दर्जनों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि राज्य शासन द्वारा कुम्हार समाज को वर्षों पूर्व भूमि उपलब्ध कराई गई थी, जिसका उपयोग समाज के लोग मिट्टी निकालने तथा मूर्ति, बर्तन और अन्य पारंपरिक सामग्री बनाने के लिए करते आ रहे हैं। कुम्हार समाज का दावा है कि पिछले लगभग 60 वर्षों से यह भूमि उनके पारंपरिक व्यवसाय का प्रमुख आधार रही है और इसी के माध्यम से कई परिवारों का जीवन-यापन होता है।
समाज के अनुसार खसरा नंबर 141, 145 एवं 374/2 की भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर आवासीय निर्माण किया जा रहा है। इससे कुम्हार समाज को मिट्टी प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो लगभग 40 कुम्हार परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट गहरा सकता है।
जिला अध्यक्ष सुदर्शन कुंभकार ने कहा कि कुम्हार समाज की यह भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि समाज की आजीविका और पारंपरिक कला का आधार है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर अतिक्रमण हटाने की त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि समाज के लोगों को राहत मिल सके।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा कुम्हार समाज की पारंपरिक कला एवं रोजगार को संरक्षित रखने के उद्देश्य से अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी, लेकिन समाज का आरोप है कि आज तक उस घोषणा के अनुरूप भूमि आवंटन नहीं किया गया। वहीं वर्तमान में उपयोग में लाई जा रही भूमि पर भी अतिक्रमण की स्थिति निर्मित होने से समाज में चिंता बढ़ गई है।
सुदर्शन कुंभकार ने चेतावनी दी कि यदि समाज की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो समाजजन आगे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि कुम्हार समाज वर्षों से अपनी मेहनत और पारंपरिक कला के माध्यम से जीवन-यापन कर रहा है, इसलिए उनकी आजीविका से जुड़े इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
फिलहाल समाजजन जिला प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और कुम्हार समाज की मांगों पर कब तक निर्णय लिया जाता है।

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