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भोरमदेव शक्कर कारखाना बना कर्मचारियों की “डेपुटेशन व्यवस्था” का केंद्र? कारखाने से ज्यादा दूसरे विभागों में दिख रहे कर्मचारी


कवर्धा। जिले के भोरमदेव शक्कर कारखाना में कर्मचारियों की तैनाती को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कारखाना के कई कर्मचारी अपने मूल कार्यस्थल पर कार्य करने के बजाय विभिन्न शासकीय विभागों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कोई वाहन चालक के रूप में सेवाएं दे रहा है तो कोई चपरासी एवं अन्य कार्यों में लगाया गया है। इस स्थिति को लेकर कारखाना की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों का कहना है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति शक्कर कारखाना के संचालन और उत्पादन संबंधी कार्यों के लिए की गई थी, वे लंबे समय से अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब कारखाना के कर्मचारी दूसरे विभागों में कार्य कर रहे हैं तो कारखाना की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे हो रही है।
जानकारों का मानना है कि यदि कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर अन्यत्र उपयोग किया जा रहा है तो इससे कारखाना के प्रशासनिक और तकनीकी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। कर्मचारियों की कमी का असर उत्पादन, रखरखाव और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार कुछ कर्मचारियों की वर्षों से कारखाना में नियमित उपस्थिति नहीं है, जबकि उनका वेतन और सेवा रिकॉर्ड कारखाना से ही संचालित हो रहा है। इससे यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या कर्मचारियों की तैनाती नियमों के अनुरूप की गई है अथवा नहीं। यदि किसी विभाग को कर्मचारियों की आवश्यकता थी तो क्या इसके लिए विधिवत आदेश जारी किए गए थे, यह भी जांच का विषय बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कारखाना के लिए स्वीकृत मानव संसाधन का उपयोग अन्य कार्यालयों में होने से शासकीय संसाधनों के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, यदि वे उसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे हैं तो इसकी समीक्षा होना आवश्यक है।
सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। कर्मचारियों की मूल पदस्थापना, वर्तमान कार्यस्थल, ड्यूटी आदेश और विभागीय स्वीकृतियों की जांच होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि भोरमदेव शक्कर कारखाना के कर्मचारी आखिर कारखाना में कम और अन्य विभागों में ज्यादा क्यों दिखाई दे रहे हैं? क्या यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है या फिर इसके पीछे कोई और कारण है? इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

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