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लोहारा ब्लॉक के छीरबांधा खरीदी केंद्र में 51 लाख के धान का रहस्य! रिकॉर्ड में 1670 क्विंटल, मौके पर एक भी बोरी नहीं

कवर्धा। लोहारा ब्लॉक के छीरबांधा धान खरीदी केंद्र में धान के स्टॉक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी रिकॉर्ड में केंद्र पर 1670.42 क्विंटल धान शेष होना दर्ज है, लेकिन मौके पर धान की एक भी बोरी दिखाई नहीं देने का दावा किया जा रहा है। इस विरोधाभास ने पूरे उपार्जन तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार जब केंद्र प्रभारी से इस संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने स्टोरेज की समस्या का हवाला दिया। हालांकि धान कहां रखा गया है, किस गोदाम में रखा गया है और उसका सत्यापन कैसे किया जा सकता है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकी। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।

3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गणना करें तो रिकॉर्ड में दर्ज धान की कीमत करीब 51 लाख 78 हजार रुपये से अधिक बैठती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों की सरकारी खरीदी व्यवस्था में लाखों रुपये मूल्य का धान कागजों में मौजूद और जमीन पर गायब कैसे दिखाई दे रहा है?

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि धान सुरक्षित भंडारित है तो उसका स्थान सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर तो नहीं है। यदि ऐसा है तो यह केवल एक खरीदी केंद्र का मामला नहीं बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और सहकारी विभाग संयुक्त जांच कर वास्तविक स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराएं। यदि रिकॉर्ड सही है तो धान कहां रखा गया है इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए और यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

छीरबांधा खरीदी केंद्र का यह मामला किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और लोग प्रशासन से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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