शिक्षा विभाग या RSS का विस्तार केंद्र? DEO पर पक्षपात और पद के दुरुपयोग के आरोप, विरोध प्रदर्शन तेज

कवर्धा। कबीरधाम जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खिलाफ विरोध का स्वर तेज होता जा रहा है। विभिन्न संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि जिला शिक्षा अधिकारी अपने प्रशासनिक दायित्वों से हटकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताते हुए DEO के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शासकीय आत्मानंद स्वामी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में आयोजित RSS के अभ्यास वर्ग को शिक्षा विभाग के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल परिसर का उपयोग किसी विशेष वैचारिक संगठन के कार्यक्रम के लिए किया जाना शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन इसके बजाय वे कथित रूप से एक विशेष संगठन के कार्यक्रमों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि DEO का व्यवहार एक निष्पक्ष सरकारी अधिकारी की बजाय “RSS एजेंट” जैसा दिखाई दे रहा है, जिससे विभाग की साख पर भी असर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब जिले के कई स्कूल बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी और शैक्षणिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब शिक्षा विभाग का ध्यान इन मुद्दों को सुलझाने के बजाय ऐसे कार्यक्रमों की ओर क्यों केंद्रित है। उनका कहना है कि सरकारी संसाधनों और परिसरों का उपयोग किसी भी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के लिए नहीं होना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा और शिक्षा विभाग के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
सूत्रों का दावा है कि इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग के अंदर भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है और कई कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



