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बैगा परिवारों की प्यास बनी व्यवस्था पर सवाल, केशमर्दा में दूषित पानी से जूझ रहे ग्रामीण


कवर्धा। कवर्धा विधानसभा के वनांचल क्षेत्र स्थित बैगा बाहुल्य ग्राम केशमर्दा में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बनकर सामने आया है। गांव के बोरिंग, कुएं और झिरिया से निकल रहे लाल व दूषित पानी के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में वही पानी पीना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों की शिकायत पर गांव पहुंचे युवा कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष तुकाराम चंद्रवंशी ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी विकास और जनकल्याण के बड़े दावे कर रही है, लेकिन केशमर्दा जैसे गांवों की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा आज भी ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं हो पाई है।

चंद्रवंशी ने कहा कि बैगा आदिवासी परिवार वर्षों से पेयजल की समस्या झेल रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को आवेदन दिए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन की विभिन्न योजनाएं संचालित हो रही हैं, तब भी दूरस्थ गांवों में लोगों को साफ पानी क्यों नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि दूषित पानी के सेवन से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

तुकाराम चंद्रवंशी ने बताया कि उन्होंने गांव की स्थिति का वीडियो भी सार्वजनिक किया है ताकि जिम्मेदार विभागों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो सके। उन्होंने मांग की कि केशमर्दा सहित आसपास के प्रभावित गांवों में पेयजल समस्या का स्थायी समाधान किया जाए तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्वच्छ पानी चाहिए। गांव में पेयजल संकट के समाधान को लेकर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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