महिला दिवस पर भी राजनीति हावी! आम महिलाओं को छोड़ नेताओं की महिलाओं का ही सम्मान

सम्मान समारोहों में उठे सवाल क्या महिला दिवस बना सिर्फ राजनीतिक मंच।
कवर्धा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बातें तो बड़े जोर-शोर से की जाती हैं, लेकिन कई जगह यह दिवस भी राजनीति की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। कार्यक्रमों में अक्सर देखा जाता है कि सम्मान केवल राजनीतिक दलों से जुड़ी महिलाओं या नेताओं के करीबी लोगों तक ही सीमित रह जाता है, जबकि समाज में मेहनत कर रही आम महिलाएं पीछे छूट जाती हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला दिवस के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में स्व-सहायता समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मजदूर महिलाएं और समाज के लिए संघर्ष कर रही कई प्रतिभाशाली महिलाओं को मंच तक नहीं मिल पाता। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या महिला दिवस वास्तव में सभी महिलाओं के सम्मान के लिए मनाया जा रहा है या फिर इसे भी राजनीतिक मंच बना दिया गया है।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिला दिवस का उद्देश्य समाज के हर वर्ग की महिला को सम्मान और समान अवसर देना है। लेकिन जब कार्यक्रमों में केवल राजनीतिक चेहरों को ही प्राथमिकता दी जाती है, तो इस दिवस का असली उद्देश्य कहीं न कहीं पीछे छूट जाता है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि सच में महिला सशक्तिकरण की बात करनी है, तो उन महिलाओं को मंच और सम्मान मिलना चाहिए जो शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज सेवा और अपने संघर्ष से समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।
आखिर सवाल यही है महिला दिवस पर सम्मान महिलाओं का होता है या राजनीति का ।




