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वन विभाग की लापरवाही से गई बायसन की जान? झूठी विज्ञप्तियों ने छिपाई हकीकत


कबीरधाम जिले में पिछले एक महीने से बीमार हालत में भटक रहे बायसन की आज रात करीब 9:30 बजे मौत हो गई, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर यह मौत प्राकृतिक थी या विभागीय लापरवाही का नतीजा?
वन विभाग लगातार प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह दावा करता रहा कि बायसन के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। जमीनी स्तर पर न तो कोई गंभीर इलाज दिखा और न ही पर्याप्त निगरानी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बायसन को समय पर इलाज नहीं मिला और वन विभाग केवल कागजों में ही उपचार का दावा करता रहा। हालत बिगड़ती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग सुधार की बात कर रहा था, तो अचानक मौत कैसे हो गई? क्या विभाग ने जानबूझकर गलत जानकारी दी? या फिर लापरवाही को छिपाने के लिए झूठी तस्वीर पेश की गई?
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में वन विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी है। लोग इसे सीधे-सीधे विभाग की घोर लापरवाही मान रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बायसन की मौत ने वन विभाग के दावों की पोल खोल दी है और यह साफ कर दिया है कि जमीनी हकीकत और कागजी दावे में कितना बड़ा फर्क है।

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