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भोरमदेव महोत्सव पर सवाल: तीन दिन का उत्सव अब एक दिन में क्यों महोत्सव की चमक फीकी, न प्रचार न तैयारी

कवर्धा। जिले की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाला भोरमदेव महोत्सव इस बार शुरू होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। हर साल धूमधाम से आयोजित होने वाला यह महोत्सव इस बार फीका नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार पहले जहां यह महोत्सव तीन दिनों तक चलता था, वहीं इस बार इसे केवल एक दिन में ही सीमित कर दिया गया है। इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों और संस्कृति प्रेमियों में असंतोष देखा जा रहा है।
हैरानी की बात यह भी है कि अब तक महोत्सव को लेकर न तो व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है और न ही कार्यक्रमों या कलाकारों की सूची सार्वजनिक की गई है। शहर में कहीं भी बड़े स्तर पर पोस्टर, बैनर या प्रचार सामग्री नजर नहीं आ रही है, जिससे लोगों को आयोजन की जानकारी ही नहीं मिल पा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भोरमदेव महोत्सव जिले की संस्कृति और पहचान से जुड़ा आयोजन है, लेकिन इस बार इसकी तैयारी और प्रचार को देखकर लग रहा है कि आयोजन को केवल औपचारिक रूप से पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
लोगों का सवाल है कि अगर महोत्सव आयोजित किया जा रहा है तो फिर इसकी जानकारी और तैयारी खुलकर क्यों नहीं दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आयोजन को लेकर क्या स्पष्टता देता है और महोत्सव को पहले जैसी गरिमा दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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