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वन विभाग की घोर लापरवाही: पिडाघाट पर्यटन स्थल खंडहर में तब्दील, हादसे को दे रहा खुला न्योता


कवर्धा से लगभग 60 किमी दूर और चिल्फी से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित पिडाघाट का पर्यटन स्थल आज वन विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। जिस जगह को प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए विकसित किया गया था, वही स्थल अब बदहाल और खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
मौके पर लगे लोहे के शेड और संरचनाएं पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। छत जगह-जगह से फटी हुई है, टीन और बोर्ड टूटकर नीचे लटक रहे हैं, और लोहे के पाइपों में जंग लग चुका है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि यह ढांचा कभी भी गिर सकता है, जिससे वहां आने वाले पर्यटकों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसके बावजूद वन विभाग ने अब तक किसी प्रकार की मरम्मत या सुरक्षा व्यवस्था करना जरूरी नहीं समझा।
सबसे गंभीर बात यह है कि इतने संवेदनशील पर्यटन स्थल पर ना कोई सुरक्षा गार्ड तैनात है और ना ही किसी प्रकार की निगरानी की व्यवस्था। ऐसे में कोई भी व्यक्ति बिना रोक-टोक इस खतरनाक ढांचे के नीचे पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लंबे समय से यहां कोई अधिकारी निरीक्षण करने तक नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वन विभाग इस स्थल को पूरी तरह भूल चुका है।
वन विभाग अक्सर पर्यटन विकास और संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन पिडाघाट की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। करोड़ों की योजनाओं की बातें करने वाला विभाग एक छोटे से पर्यटन स्थल की देखरेख तक नहीं कर पा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इस स्थल का निरीक्षण कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे वन विभाग पर होगी।

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