आश्वासन के दो दिन बाद चला बुलडोजर: नकटी में घरों के साथ जनता का भरोसा भी टूटा

रायपुर। राजधानी से लगे नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 27 जून को क्षेत्र के सांसद और विधायक ने गांव पहुंचकर लोगों को भरोसा दिलाया था कि बरसात के मौसम में उनके आशियाने नहीं तोड़े जाएंगे। सांसद ने मीडिया के सामने भी ऐसा ही आश्वासन दिया था, जबकि विधायक ने वीडियो जारी कर कहा था कि वे नकटी की जनता के साथ खड़े हैं।
इन आश्वासनों के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लोगों को विश्वास था कि कम से कम बारिश के मौसम में उनके सिर से छत नहीं छीनी जाएगी। कई परिवारों ने वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की, क्योंकि उन्हें अपने जनप्रतिनिधियों के वादों पर भरोसा था।
लेकिन 29 जून की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए। ग्रामीणों के मुताबिक, हजारों की संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया। इसके बाद बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई और देखते ही देखते करीब चार घंटे के भीतर पूरा गांव मलबे में तब्दील हो गया। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई परिवार अपने घरों का सामान तक नहीं निकाल पाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल मकानों को गिराने की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि उन वादों और भरोसे को भी तोड़ने वाली घटना थी, जो जनप्रतिनिधियों ने दो दिन पहले दिया था। लोगों का आरोप है कि यदि प्रशासन को कार्रवाई करनी ही थी, तो फिर आश्वासन देकर उन्हें गुमराह क्यों किया गया।
इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरसात के बीच रहने की है। खुले आसमान के नीचे आ चुके लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की मांग की है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रभावित ग्रामीण जवाब मांग रहे हैं कि आखिर दो दिन में ऐसा क्या बदल गया कि आश्वासन बुलडोजर के सामने टिक नहीं पाया।




