कवर्धा जिला प्रेस क्लब विवाद गहराया, नई कार्यकारिणी और पूर्व पदाधिकारी आमने-सामने; भवन प्रभार सौंपने का नोटिस जारी

कवर्धा। जिला प्रेस क्लब कवर्धा का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नई कार्यकारिणी के निर्वाचन, सदस्यता, प्रेस क्लब भवन के प्रभार तथा आय-व्यय की पारदर्शिता को लेकर पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी आमने-सामने हैं। इसी क्रम में नवनिर्वाचित सचिव विजय धृतलहरे ने प्रेस वार्ता आयोजित कर पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा एवं पूर्व कोषाध्यक्ष डी.एन. योगी द्वारा लगाए गए आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया।
विजय धृतलहरे ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा का कार्यकाल 7 जून 2026 तक था, जिसके बाद नई कार्यकारिणी के निर्वाचन की प्रक्रिया संपन्न कराई जानी थी। उनका आरोप है कि लंबे समय से सामान्य सभा का आयोजन नहीं किया गया था। इसके बाद पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी दुर्ग के मार्गदर्शन में निर्वाचन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और 6 सितंबर 2026 को आयोजित आमसभा में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें यशवंत सिंह ठाकुर को अध्यक्ष तथा विजय धृतलहरे को सचिव चुना गया।
नई कार्यकारिणी के गठन के बाद विवाद तब सामने आया जब पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा और पूर्व कोषाध्यक्ष डी.एन. योगी ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन में शामिल कई लोग प्रेस क्लब के सदस्य नहीं हैं तथा फर्जी निर्वाचन कर नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय धृतलहरे ने कहा कि जिन 58 लोगों के हस्ताक्षर से पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा अध्यक्ष बने थे, आज उन्हीं लोगों की सदस्यता पर सवाल उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उन सदस्यों को सदस्य नहीं माना जाता है, तो पूर्व अध्यक्ष बनने की पूरी प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
प्रेस क्लब भवन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया है। पूर्व कोषाध्यक्ष डी.एन. योगी ने आरोप लगाया कि नई कार्यकारिणी से जुड़े लोग भवन में मारपीट करने और चाबी छीनने के उद्देश्य से पहुंचे थे। इस आरोप को खारिज करते हुए विजय धृतलहरे ने कहा कि यह केवल निराधार आरोप हैं। उन्होंने कहा कि यदि वही लोग गुंडे हैं, तो पूर्व अध्यक्ष उन्हीं लोगों के समर्थन और हस्ताक्षर से अध्यक्ष कैसे बने थे।
विजय धृतलहरे ने आरोप लगाया कि कुछ लोग वर्ष 2007 से प्रेस क्लब की कुर्सी पर बने हुए हैं और अब नई कार्यकारिणी के गठन को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रेस क्लब भवन को किराये पर दिए जाने तथा उससे प्राप्त आय के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रेस क्लब भवन पत्रकारों की गतिविधियों के लिए बनाया गया है और इसके उपयोग तथा आय-व्यय में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए।
इसी बीच मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। तहसीलदार कवर्धा द्वारा पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा को नोटिस जारी कर दो दिवस के भीतर जिला प्रेस क्लब भवन का प्रभार नवनिर्वाचित अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर एवं नई कार्यकारिणी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस नोटिस के बाद भवन के प्रभार को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है।
दूसरी ओर, नवनिर्वाचित अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर और सचिव विजय धृतलहरे पर बिना प्रस्ताव और स्वीकृति के निर्माण कार्य कराने का आरोप भी लगाया गया है। इस पर विजय धृतलहरे ने कहा कि जिस निर्माण कार्य को अब अवैध बताया जा रहा है, उसका प्रस्ताव आरोप लगाने वाले पक्ष की ओर से ही सर्वसम्मति से पारित किया गया था और उसी प्रस्ताव के आधार पर निर्माण कराया जा रहा था।
धृतलहरे ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों तक सामान्य सभा और नियमित निर्वाचन नहीं कराए गए तथा कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया अपनाई जाती रही। उन्होंने कहा कि उपाध्यक्ष और सचिव के रूप में उन्होंने पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी दुर्ग के मार्गदर्शन में निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कराई और आमसभा के माध्यम से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।
फिलहाल जिला प्रेस क्लब कवर्धा के इस विवाद में सदस्यता, निर्वाचन प्रक्रिया, प्रेस क्लब भवन का प्रभार, भवन को किराये पर दिए जाने तथा निर्माण कार्य को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। एक ओर पूर्व पदाधिकारी नई कार्यकारिणी की वैधता और सदस्यता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नई कार्यकारिणी अपने निर्वाचन को विधिसम्मत बताते हुए आरोपों को खारिज कर रही है।
तहसीलदार द्वारा जारी नोटिस के बाद अब इस पूरे मामले पर पत्रकारों और जिले के लोगों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सदस्यता रजिस्टर, आमसभा की कार्यवाही, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज, पंजीयक कार्यालय के रिकॉर्ड तथा भवन से संबंधित अभिलेखों के आधार पर विवाद की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।



