प्रेस क्लब विवाद में आरोपों पर पलटवार: यशवंत सिंह ठाकुर बोले- बहुमत से निर्वाचित कार्यकारिणी को बदनाम करने गढ़ी जा रही भ्रामक कहानी

कवर्धा। जिला प्रेस क्लब कवर्धा को लेकर चल रहे विवाद में अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रकाश वर्मा एवं डी.एन. योगी पक्ष की ओर से समाचार माध्यमों में यशवंत सिंह ठाकुर एवं अन्य सदस्यों पर लगाए जा रहे आरोपों का संबंधित पक्ष ने कड़ा खंडन किया है। उनका कहना है कि पुराने पदाधिकारियों की ओर से अपनी स्थिति बचाने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है और निर्वाचित नई कार्यकारिणी को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
तहसीलदार ने पूर्व अध्यक्ष को दिया 2 दिन का अल्टीमेटम, अवैध कब्जा हटाने के निर्देश मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। न्यायालय तहसीलदार कवर्धा (जिला-कबीरधाम) द्वारा पूर्व अध्यक्ष प्रकाश वर्मा के नाम ज्ञापन (क्रमांक 854/रीडर/तह./2026, दिनांक 15.09.2026) जारी किया गया है।
ज्ञापन के अनुसार, नवनिर्वाचित अध्यक्ष यशवंत सिंह ठाकुर के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए उल्लेख किया गया है कि पूर्व कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद निर्वाचन संपन्न होकर नई कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। इसके बावजूद पूर्व अध्यक्ष द्वारा भवन पर कब्जा बनाए रखा गया है और भवन के कुछ हिस्सों को किराये पर दिए जाने के कारण जिले के पत्रकारों के लिए इसका निर्धारित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
तहसीलदार ने निर्देशित किया है कि पूर्व अध्यक्ष दो दिवस के भीतर अवैध कब्जे को हटाकर भवन का प्रभार, चाबी एवं संबंधित अभिलेख नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को सौंपना सुनिश्चित करें। ऐसा न करने की स्थिति में उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
2007 से चल रहा पंजीयन, सीमित लोगों के प्रभाव का आरोप
यशवंत सिंह ठाकुर पक्ष का कहना है कि जिला प्रेस क्लब कवर्धा का पंजीयन वर्ष 2007 में हुआ है और लंबे समय से संस्था के संचालन में सीमित लोगों का ही प्रभाव रहा है। उनका आरोप है कि प्रकाश वर्मा और डी.एन. योगी स्वयं को लंबे समय तक पदाधिकारी बताते रहे, जबकि क्लब की सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
सदस्यता के आरोपों पर दिया जवाब विपक्ष की ओर से नई कार्यकारिणी के सदस्यों को बाहरी और फर्जी बताए जाने पर यशवंत सिंह ठाकुर पक्ष ने कहा कि यह दावा वास्तविक रिकॉर्ड के विपरीत है। वर्ष 2023 में स्वयं क्लब की ओर से पत्रकारों एवं पदाधिकारियों से संबंधित जानकारी फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी।
उनके अनुसार, उस समय क्लब की व्यवस्था में यशवंत सिंह ठाकुर उपाध्यक्ष, विजय धृतलहरे सचिव तथा श्याम टंडन प्रबंध समिति सदस्य के रूप में शामिल थे। बाद में प्रबंध समिति में आवश्यक बदलाव भी हुए। ऐसे में आज उन्हीं लोगों को बाहरी या अधिकारविहीन बताना विरोधाभासी है।
58 सदस्यों को लेकर भी उठाया सवाल
नई कार्यकारिणी का कहना है कि प्रेस क्लब से जुड़े 58 पत्रकारों की सदस्यता एवं पदाधिकारियों संबंधी जानकारी पूर्व में विभाग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। इसके बावजूद अब उन्हीं पत्रकारों की मौजूदगी और सदस्यता पर सवाल खड़े करना समझ से परे है।
खाली चेक और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का मुद्दा
यशवंत सिंह ठाकुर, विजय धृतलहरे, श्याम टंडन और ईश्वर कुंभकार ने अपनी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि क्लब के कामकाज के दौरान उनसे कई बार कोरे कागज, प्रस्ताव पत्र और चेक पर हस्ताक्षर कराए गए। जुलाई 2026 के प्रथम सप्ताह में भी तीन कोरे चेक एवं प्रस्ताव पत्र पर हस्ताक्षर लिए गए थे।
धृतलहरे का कहना है कि यदि उनके हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। इस विषय को लेकर उन्होंने संबंधित विभाग के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
कार्यकाल पूरा होने के बाद कराया गया चुनाव
नई कार्यकारिणी के पक्ष का कहना है कि पूर्व कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सदस्यों को सूचना देकर पारदर्शी तरीके से चुनाव कराया गया, जिसमें यशवंत सिंह ठाकुर को अध्यक्ष और विजय धृतलहरे को सचिव चुना गया। चुनाव से संबंधित दस्तावेज एवं कार्यवाही की जानकारी उप पंजीयक (फर्म्स एवं संस्थाएं दुर्ग) तथा जिला प्रशासन कबीरधाम को लिखित रूप से दी जा चुकी है।
प्रेस क्लब भवन को निजी संपत्ति बताने पर भी पलटवार
प्रेस क्लब भवन का निर्माण शासकीय संसाधनों से पत्रकारों के उपयोग एवं जनहित के उद्देश्य से हुआ है। इसलिए भवन को किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने का प्रश्न ही नहीं उठता। भवन से प्रतिमाह करीब 30 हजार रुपये किराया वसूले जाने के आरोप पर भी नई कार्यकारिणी ने सवाल उठाते हुए पारदर्शी हिसाब-किताब की मांग की है।
समाचारों से नहीं, रिकॉर्ड से तय होगी वैधता
यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा, “हमें फर्जी या बाहरी बताकर बदनाम करने की कोशिश से वास्तविक तथ्य नहीं बदलेंगे। हम संस्था के सदस्य रहे हैं, पदाधिकारी रहे हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुए चुनाव में नई जिम्मेदारी मिली है। हमारे खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का जवाब रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाएगा। प्रेस क्लब किसी की निजी जागीर नहीं है, इसे पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।




