भूमि डायवर्सन में रिश्वत मांगने का आरोप, लोहारा SDM कार्यालय के लिपिक पर शिकायत



कवर्धा। सहसपुर लोहारा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय में भूमि डायवर्सन के एक प्रकरण को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। ग्राम दरीगवा निवासी संतोष जायसवाल ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव पर अतिरिक्त राशि की मांग करने और प्रकरण को लंबित रखने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
संतोष जायसवाल के अनुसार उन्होंने अपनी माता उदासा बाई पति जकलू राम के नाम दर्ज खसरा नंबर 656/6, रकबा 0.0240 हेक्टेयर भूमि के आवासीय प्रयोजन के लिए 13 मई 2026 को ऑनलाइन डायवर्सन आवेदन किया था। शिकायत में कहा गया है कि ई-चालान का भुगतान करने के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए गए थे। ग्राम एवं नगर निवेश विभाग की विकास अनुज्ञा भी आवेदन के साथ संलग्न की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि एसडीएम कार्यालय में दस्तावेजों की जांच भी कराई गई थी और उन्हें सही बताया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव ने खाली भूमि के लिए करीब 75 हजार रुपए का चालान आने की बात कही थी। वहीं, शिकायतकर्ता के अनुसार राजस्व निरीक्षक से जानकारी लेने पर किसी अन्य अतिरिक्त चालान की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई। एसडीएम से मिलने पर भी अतिरिक्त चालान की जानकारी नहीं मिलने का दावा शिकायत में किया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता से कथित रूप से 30 हजार रुपए की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि आवेदन के करीब 15 दिन बाद उसने लिपिक को 15 हजार रुपए दिए थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राशि देने के बाद भी उससे और पैसे की मांग की गई और प्रकरण का निराकरण नहीं हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार 13 मई से 17 सितंबर तक 116 दिन बीतने के बाद भी डायवर्सन आदेश जारी नहीं किया गया।
शिकायत में संतोष जायसवाल ने यह भी आरोप लगाया है कि लिपिक द्वारा कथित राशि सहसपुर लोहारा स्थित एक कंप्यूटर दुकान के माध्यम से नगद और UPI के जरिए लेने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित कर्मचारी के कहने पर राशि देने की व्यवस्था की गई। हालांकि कंप्यूटर दुकान, भुगतान और UPI लेन-देन से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सहसपुर लोहारा एसडीएम कार्यालय में आने वाले अन्य भूमि डायवर्सन प्रकरणों में भी बिना अतिरिक्त राशि के काम नहीं होने की स्थिति है। उनका कहना है कि यदि कार्यालय में प्राप्त सभी डायवर्सन आवेदनों की ऑनलाइन स्थिति और उनके निराकरण की जांच की जाए तो कई मामलों की स्थिति सामने आ सकती है।
इसी मामले में एक अन्य आवेदक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि ऑनलाइन डायवर्सन प्रक्रिया होने के बावजूद प्रकरण को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया कार्यालय स्तर पर निर्भर रहती है। आवेदक के अनुसार आवेदन ऑनलाइन होने के बाद भी यदि कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती तो आवेदक को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं और लंबे समय तक परेशान होने के बाद वह पैसे देने के लिए तैयार हो जाता है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संतोष जायसवाल ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यालय में प्राप्त डायवर्सन प्रकरणों की स्थिति की जांच करने और उनके प्रकरण का नियमानुसार निराकरण कराने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री कार्यालय तथा कवर्धा और पंडरिया विधानसभा के विधायकों को भेजे जाने का भी उल्लेख है।
अब मामले में जिला प्रशासन की जांच और संबंधित एसडीएम कार्यालय का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। शिकायत में लगाए गए रिश्वत, राशि की मांग, प्रकरण लंबित रखने और कंप्यूटर दुकान के माध्यम से नगद व UPI भुगतान लेने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।




