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तालपुर में सरकारी नाले की जमीन पर प्लाटिंग का आरोप, सात सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट अब तक अधूरी

पांच पटवारी और दो राजस्व निरीक्षकों को सौंपी गई थी जांच की जिम्मेदारी; एक माह बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं, नाले की जमीन और जलभराव को लेकर उठ रहे सवाल
कवर्धा। ग्राम तालपुर में शासकीय नाले की जमीन पर कथित अतिक्रमण और अवैध प्लाटिंग का मामला अब राजस्व विभाग की जांच प्रक्रिया को लेकर सवालों के घेरे में है। शिकायत के बाद पांच पटवारियों और दो राजस्व निरीक्षकों की सात सदस्यीय टीम गठित की गई थी, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी जांच प्रतिवेदन पूरा नहीं होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने अधिकारियों की टीम को जांच पूरी करने में इतना समय क्यों लग रहा है और शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति कब तक स्पष्ट होगी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तालपुर में खसरा क्रमांक 86 की शासकीय भूमि पर स्थित नाले को लेकर शिकायत की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाले की जमीन को प्रभावित कर प्लाटिंग की गई और भूमि का विक्रय भी किया गया। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी की शिकायत के बाद तहसीलदार कवर्धा ने मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित की थी। हालांकि, जांच की वर्तमान स्थिति और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की समय-सीमा को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सात अधिकारियों की टीम, फिर भी जांच का निष्कर्ष नहीं
मामले में पांच पटवारी और दो राजस्व निरीक्षकों को शामिल किए जाने के बाद उम्मीद थी कि संबंधित खसरों का सीमांकन, राजस्व अभिलेखों का मिलान और स्थल निरीक्षण कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। लेकिन एक माह बाद भी रिपोर्ट अधूरी रहने की बात सामने आने से जांच की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या जांच टीम ने संबंधित भूमि का भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया है? क्या शासकीय नाले की वास्तविक सीमा निर्धारित की गई है? यदि जांच पूरी नहीं हुई है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं और रिपोर्ट प्रस्तुत करने में कितना समय लगेगा? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की ओर से आना बाकी है।
दर्जनों खसरों में प्लाटिंग, सीमांकन की दरकार
तालपुर में खसरा क्रमांक 82/201, 82/178, 95, 96/1, 96/11, 96/3, 92/11 और 80/1 सहित अन्य खसरों में प्लॉट काटे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित भूमि पर की गई प्लाटिंग नियमानुसार है या नहीं और कहीं शासकीय नाले अथवा प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते को तो प्रभावित नहीं किया गया है।
राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का वास्तविक मौके से मिलान, सीमांकन और प्लाटिंग से संबंधित अनुमतियों की जांच होने पर ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या अनियमित विक्रय की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय मार्ग पर जलभराव, नाले की स्थिति भी जांच के दायरे में
ग्राम तालपुर में रायपुर से बिलासपुर-जबलपुर की ओर जाने वाले राष्ट्रीय मार्ग पर पेट्रोल पंप से ट्रैक्टर शोरूम तक बारिश के दौरान जलभराव होने की समस्या भी सामने आती रही है। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है, वहीं सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खसरा क्रमांक 86 में 4 एकड़ 75 डिसमिल तथा खसरा क्रमांक 78 में 1 एकड़ 20 डिसमिल नाले की भूमि दर्ज होने की बात कही जा रही है। इन भूमि अभिलेखों की आधिकारिक पुष्टि और मौके पर नाले की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। यदि जल निकासी का प्राकृतिक मार्ग बाधित हुआ है, तो उसका असर आसपास के क्षेत्रों और राष्ट्रीय मार्ग पर पड़ सकता है।
अब प्रशासन से जवाब का इंतजार
तालपुर के मामले में सबसे बड़ा सवाल केवल कथित प्लाटिंग का नहीं, बल्कि शासकीय भूमि के संरक्षण और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी है। एक ओर नाले की जमीन को लेकर शिकायत है, दूसरी ओर बारिश में जलभराव की समस्या और जांच रिपोर्ट में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब राजस्व विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि सात सदस्यीय टीम ने अब तक क्या जांच की है, प्रतिवेदन कब तक प्रस्तुत होगा और नाले की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल जांच रिपोर्ट सामने आने और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।

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