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नंदनी कुमान में बच्चों की मौतों पर सरकार घिरी, सत्ता की कुर्सी से उतरकर गांव पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा : कांग्रेस



चार महीने में 5 बच्चों की मौत का दावा, 14 बच्चे अस्पताल में भर्ती; आखिर वनांचल में कुपोषण पर सरकारी योजनाओं का असर कहां।

कवर्धा। कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल स्थित नंदनी कुमान गांव में बच्चों की मौत और कुपोषण की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस की सात सदस्यीय जांच टीम के गांव पहुंचने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कांग्रेस ने क्षेत्रीय विधायक एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को निशाने पर लेते हुए सवाल किया है कि जब उनके ही विधानसभा क्षेत्र में मासूम बच्चों की जिंदगी संकट में है, तो आखिर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों के बीच कब पहुंचेंगे?
पांच बच्चों की मौत, फिर भी व्यवस्था पर सवाल!
कांग्रेस जांच दल के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार महीनों में गांव के पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं, 14 बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 12 बच्चे बोड़ला स्वास्थ्य केंद्र में उपचाररत बताए गए, जबकि दो बच्चों की गंभीर स्थिति के चलते उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों ने गांव में लगभग 10 अन्य बच्चों के कुपोषण से प्रभावित होने की बात भी जांच दल को बताई।
यदि ये आंकड़े सही हैं, तो सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर समय रहते बच्चों की स्वास्थ्य जांच, पोषण और उपचार की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई? क्या संबंधित विभागों को बच्चों की स्थिति की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए? इन सवालों का जवाब अब स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को देना चाहिए।
सत्ता की कुर्सी से उतरकर नंदनी कुमान आइए उपमुख्यमंत्री
कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और सांसद संतोष पांडे की कथित अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल मंचों से विकास के दावे करना नहीं, बल्कि संकट के समय जनता के बीच खड़े होना भी है।
कांग्रेस का सवाल है कि जब वनांचल के मासूम बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन का मामला सामने आया है, तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों की पीड़ा क्यों नहीं सुन रहे? क्या सरकारी योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों और रिपोर्टों तक सीमित रह गई है?
कांग्रेस ने मांग की है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सत्ता की कुर्सी से उतरकर नंदनी कुमान पहुंचें, पीड़ित परिवारों से मिलें और बच्चों की स्थिति का स्वयं जायजा लें। हालांकि, संबंधित जनप्रतिनिधियों के दौरे और विभागीय कार्रवाई की स्थिति पर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
करोड़ों के बजट के बावजूद बच्चों तक पोषण क्यों नहीं।
आदिवासी एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए स्वास्थ्य, पोषण और महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाएं संचालित की जाती हैं। इसके बावजूद यदि किसी गांव में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण से प्रभावित बताए जा रहे हैं और बच्चों की मौतों की जानकारी सामने आ रही है, तो योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की जमीनी व्यवस्था कमजोर है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि बच्चों की नियमित निगरानी, पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था प्रभावी ढंग से चल रही है, तो नंदनी कुमान में ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई ।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग गांव में बच्चों की वास्तविक संख्या, उनकी स्वास्थ्य स्थिति, पोषण आहार की उपलब्धता और उपचार व्यवस्था का तथ्यात्मक विवरण सार्वजनिक करें।
कांग्रेस जांच दल ने गांव और अस्पताल का किया निरीक्षण
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित सात सदस्यीय जांच दल ने मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी के नेतृत्व में बोड़ला स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। टीम ने भर्ती बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा नंदनी कुमान पहुंचकर प्रभावित परिवारों से जानकारी ली।
भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मनोज मंडावी और आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष जनक ध्रुव ने भी आदिवासी बच्चों की स्थिति पर चिंता जताई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बच्चों को समय पर उपचार, पौष्टिक आहार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
अब जवाबदेही तय होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा
नंदनी कुमान का मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पांच बच्चों की मौत का दावा और 14 बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन को तत्काल वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस ने बच्चों की मौतों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा प्रभावित बच्चों को तत्काल उपचार और पोषण उपलब्ध कराने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यही है यदि वनांचल के बच्चों को समय पर स्वास्थ्य और पोषण सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ आखिर किस तक पहुंच रहा है? अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इन गंभीर सवालों का जवाब देकर व्यवस्था में सुधार करते हैं या नंदनी कुमान के मासूमों की पीड़ा राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाती है।

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