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माँ नर्मदा श्रद्धालुओं की सेवा के लिए देवर्षि श्री नारद सेवा समिति की अनूठी पहल, भोरमदेव पैदल यात्रा में लगेगा सेवा स्टॉल, अमरकंटक में तीन दिवसीय विशाल प्रसादी भंडारा

कबीरधाम/अमरकंटक। सावन माह में भगवान शिव एवं माँ नर्मदा के दर्शन के लिए निकलने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सेवा के उद्देश्य से देवर्षि श्री नारद सेवा समिति द्वारा इस वर्ष विशेष सेवा अभियान चलाया जा रहा है। समिति की ओर से भोरमदेव पैदल यात्रा मार्ग पर सेवा स्टॉल लगाने के साथ-साथ अमरकंटक में तीन दिवसीय विशाल प्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

समिति के सदस्यों ने बताया कि 3 अगस्त, सावन के प्रथम सोमवार को भोरमदेव पैदल यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष सेवा स्टॉल लगाया जाएगा। इस स्टॉल पर पैदल यात्रा कर रहे शिवभक्तों एवं कांवड़ यात्रियों को निःशुल्क पेयजल, प्रसाद, फल एवं अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। समिति का उद्देश्य यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सेवा भाव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं को सशक्त बनाया जा सके।

इसके बाद 10, 11 एवं 12 अगस्त को अमरकंटक स्थित अमलेश्वर माँ अन्नपूर्णा मंदिर के सामने लगातार तीन दिनों तक विशाल प्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान माँ नर्मदा के उद्गम स्थल और भगवान शिव के दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन प्रसाद वितरित किया जाएगा। समिति ने इस आयोजन की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें भोजन व्यवस्था, पेयजल, बैठने की सुविधा एवं स्वयंसेवकों की टीम तैनात रहेगी।

समिति का मानना है कि सावन माह सेवा, भक्ति और समर्पण का पर्व है। इसी भावना के साथ समिति हर वर्ष धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सेवा का कार्य करती रही है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है।

देवर्षि श्री नारद सेवा समिति में पत्रकार बन्धु , सूरज मानिकपुरी, ऋषिकांत कुंभकार, नीरज शर्मा, रोशन बघेल, विकाश सोनी एवं मुकेश अवस्थी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। समिति के सभी सदस्य सेवा कार्यों की तैयारियों में जुटे हुए हैं और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे आयोजन में शामिल होकर प्रसादी ग्रहण करें तथा सेवा कार्य में सहयोग प्रदान करें।

समिति ने क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं श्रद्धालुओं से भी इस पुण्य कार्य में सहभागिता निभाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और सावन माह में किया गया सेवा कार्य विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

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