पहले प्रशासनिक तबादला, फिर आपसी स्थानांतरण! कबीरधाम शिक्षा विभाग के आदेशों पर उठे सवाल, प्रधानपाठक पर कार्यमुक्ति का दबाव


कवर्धा/बोड़ला। कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में एक स्थानांतरण प्रकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विकासखंड बोड़ला अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बोइरकछरा में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) नीलम कुमार धनकर के आपसी स्थानांतरण मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की कार्यवाही चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले में आदेशों की प्रक्रिया, नियमों की व्याख्या तथा विद्यालय में शिक्षकीय व्यवस्था को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहायक शिक्षक (एल.बी.) कर्नल तिवारी, जो शासकीय प्राथमिक शाला पौनी, विकासखंड पंडरिया में पदस्थ थे, उनका 06 अगस्त 2026 को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण किया जा चुका था। इसके बाद 25 अगस्त 2026 को कर्नल तिवारी एवं नीलम कुमार धनकर के बीच आपसी (म्यूचुअल) स्थानांतरण का आदेश जारी कर दिया गया।
विवाद तब और बढ़ गया जब 27 अगस्त 2026 तथा 16 सितंबर 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बोड़ला एवं जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम द्वारा पत्र जारी कर बोइरकछरा के प्रधानपाठक को नीलम कुमार धनकर को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए। बताया जा रहा है कि आदेश का पालन नहीं होने पर प्रधानपाठक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मामले में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि कर्नल तिवारी का पहले ही प्रशासनिक स्थानांतरण हो चुका था, तो बाद में उनके नाम से आपसी स्थानांतरण आदेश किस आधार पर जारी किया गया। वहीं यह भी चर्चा है कि आपसी स्थानांतरण की मूल भावना दोनों शिक्षकों द्वारा एक-दूसरे के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने की होती है। ऐसे में यदि संबंधित शिक्षक नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने उपलब्ध नहीं हैं, तो केवल एक शिक्षक को कार्यमुक्त करने से विद्यालय में शिक्षकीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानपाठक का पक्ष यह है कि विद्यालय के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और नियमों के अनुरूप स्थिति स्पष्ट होने तक कार्यमुक्ति की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। दूसरी ओर विभागीय अधिकारी आदेश के पालन पर जोर दे रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया, आदेशों के समन्वय और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रशासनिक स्थानांतरण और आपसी स्थानांतरण के आदेश एक साथ किस परिस्थिति में प्रभावी हुए तथा वर्तमान स्थिति में नियमानुसार कौन-सी प्रक्रिया लागू होगी।
अब सभी की नजर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर है कि वे इस प्रकरण में क्या निर्णय लेते हैं और विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।
यदि विभाग या संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध हो, तो उसे भी खबर में शामिल करना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित रहेगा।




