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दैहानडीह में कथित झोलाछाप डॉक्टर का क्लिनिक, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल; लोहारा BMO की जिम्मेदारी भी कटघरे में


हाईस्कूल के सामने इस्तेमाल की गई सुई और मेडिकल कचरा खुले में छोड़ने का आरोप, स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ की आशंका

कवर्धा/लोहारा। कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत दैहानडीह में हाईस्कूल के सामने कथित रूप से संचालित क्लिनिक को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा सुबह से देर रात तक क्लिनिक में बैठकर मरीजों का इलाज किया जाता है। संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और क्लिनिक संचालन की वैधता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्कूल के सामने क्लिनिक, इस्तेमाल की गई सुई खुले में छोड़ने का आरोप
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, इंजेक्शन लगाने के बाद इस्तेमाल की गई निडिल टेबल पर ही छोड़ दी जाती है और इस्तेमाल की गई रूई को इधर-उधर फेंक दिया जाता है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मरीजों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों और स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि क्लिनिक के सामने हाईस्कूल स्थित है, जहां विद्यार्थियों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में यदि खेलते समय किसी बच्चे को इस्तेमाल की गई सुई चुभ जाती है, तो संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
बोड़ला ब्लॉक में पांच बच्चों की मौत की घटना के बाद बढ़ी चिंता
बोड़ला ब्लॉक में कुछ दिन पहले पांच बच्चों की मौत की घटना सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, निगरानी व्यवस्था और उपचार की गुणवत्ता को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, इस घटना और दैहानडीह स्थित कथित क्लिनिक के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी ऐसी घटनाओं के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण इलाकों में संचालित निजी क्लिनिकों, झोलाछाप चिकित्सकों और मेडिकल कचरे के निपटारे की व्यवस्था की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लापरवाही का सीधा असर बच्चों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है। इसलिए बोड़ला ब्लॉक में हुई घटना की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ दैहानडीह में कथित क्लिनिक की गतिविधियों का भी नियमानुसार सत्यापन जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता या आवश्यक पंजीयन के इलाज किए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति द्वारा नियमों के विपरीत क्लिनिक संचालित किया जा रहा है, तो उसकी जांच करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। इसी तरह इस्तेमाल की गई सुइयों और अन्य जैव-चिकित्सकीय कचरे का सुरक्षित निपटारा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी आखिर कहां है?
ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कौन कर रहा है? क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस क्लिनिक की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक निरीक्षण और सत्यापन की स्थिति क्या है? और यदि जानकारी नहीं है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
लोहारा BMO की जवाबदेही पर सवाल
इस पूरे मामले में लोहारा के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। संबंधित क्षेत्र में संचालित क्लिनिक की चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन, इलाज की प्रकृति और मेडिकल कचरे के निपटारे की व्यवस्था की जांच कराने की जिम्मेदारी संबंधित स्वास्थ्य प्रशासन की है।
हालांकि, लोहारा BMO को इस मामले की जानकारी थी या नहीं और उनकी ओर से कोई निरीक्षण किया गया है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में BMO से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दैहानडीह में संचालित कथित क्लिनिक की जांच कब कराई जाएगी? क्या संबंधित व्यक्ति की डिग्री और पंजीयन का सत्यापन किया जाएगा? क्या इस्तेमाल की गई सुइयों को खुले में छोड़ने के आरोपों की जांच होगी? और क्या स्कूल के आसपास बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?
सिर्फ शिकायत या घटना सामने आने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को नियमित निगरानी और समयबद्ध निरीक्षण के माध्यम से ऐसी संभावित लापरवाही को रोकना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए
स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है, न कि उनके सामने नए स्वास्थ्य जोखिम खड़े करना। इस्तेमाल की गई सुई को खुले में छोड़ना किसी भी स्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती। हालांकि, दैहानडीह के मामले में आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और लोहारा BMO इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या संबंधित क्लिनिक का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी, या मामला जांच के इंतजार में ही अटका रहेगा?
बड़े सवाल:
क्या संबंधित व्यक्ति के पास मरीजों का इलाज करने की वैध चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक पंजीयन है?
क्या क्लिनिक में इस्तेमाल की गई सुइयों और मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटारे की व्यवस्था है?
क्या स्वास्थ्य विभाग ने कभी इस क्लिनिक का निरीक्षण किया है?
दैहानडीह के मामले में लोहारा BMO की ओर से जांच और निगरानी को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे?
यदि किसी स्कूली बच्चे को इस्तेमाल की गई सुई चुभ जाती है, तो उसकी सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या है?

अब जरूरत है निष्पक्ष जांच, तथ्यों के सत्यापन और नियमानुसार कार्रवाई की, ताकि स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का जोखिम न हो।

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