स्वदेशी मेला पर विवाद गहराया: ना प्रचार ना तैयारी,नदारद जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

कवर्धा। पी.जी. कॉलेज मैदान में 27 मार्च से शुरू होने जा रहे “स्वदेशी मेला” को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आयोजन को भव्य बताने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। मेले की तैयारियों में भारी लापरवाही और अव्यवस्था सामने आ रही है, जिससे आयोजन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मेले के लिए मैदान में अब तक समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। न तो पर्याप्त साफ-सफाई दिख रही है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर आ रहे हैं। ऐसे में हजारों लोगों की भीड़ जुटने की संभावना के बीच किसी भी तरह की अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा आरोप स्टॉल आवंटन को लेकर सामने आया है। छोटे और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उन्हें नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि बिना स्पष्ट प्रक्रिया के मनमाने तरीके से स्टॉल दिए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, मेले में खर्च हो रही बड़ी रकम को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। प्रायोजकों के नाम सामने आने के बावजूद, आम जनता और स्थानीय प्रतिनिधियों को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि आखिर इस आयोजन में कितना बजट खर्च हो रहा है और उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और संदिग्ध बना रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “स्वदेशी” के नाम पर हो रहा यह आयोजन कहीं सिर्फ दिखावे तक सीमित न रह जाए। यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो यह मेला अव्यवस्था और विवाद का केंद्र बन सकता है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों को कितना गंभीरता से लेता है और क्या वाकई मेले को सुरक्षित व पारदर्शी बना पाता है, या फिर यह आयोजन सवालों के घेरे में ही घिरा रहेगा।




