छत्तीसगढ़ में 1 मई से जनगणना शुरू: मातृभाषा “छत्तीसगढ़ी” में जानकारी देने की अपील, पहचान बचाने का मौका

छत्तीसगढ़। प्रदेश में 1 मई से जनगणना का महत्वपूर्ण कार्य शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर शासन-प्रशासन अपनी तैयारियों में जुट गया है। जनगणना के दौरान अधिकारी और कर्मचारी घर-घर जाकर नागरिकों से विभिन्न जानकारियां एकत्र करेंगे। ऐसे में प्रदेशवासियों से विशेष अपील की जा रही है कि वे अपनी जानकारी देते समय अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को ही दर्ज कराएं।
जानकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के लोग अपनी भाषा के स्थान पर हिंदी को दर्ज करा देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 2 करोड़ 13 लाख 927 लोग हिंदी भाषी के रूप में दर्ज हैं, जबकि वास्तविकता में इनमें से अधिकांश लोग दैनिक जीवन में छत्तीसगढ़ी का ही उपयोग करते हैं। इस कारण छत्तीसगढ़ी भाषा के सही आंकड़े सामने नहीं आ पाते और उसे वह पहचान नहीं मिल पाती जिसकी वह हकदार है।
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार होती है। छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रदेश की लोक संस्कृति, गीत, परंपराएं और इतिहास समाहित है। यदि जनगणना में सही जानकारी नहीं दी जाएगी, तो आने वाले समय में इस भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही सरकारें भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक योजनाएं बनाती हैं। ऐसे में यदि छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखाई देगी, तो इस भाषा के विकास के लिए आवश्यक योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
प्रदेशवासियों से अपील:
जनगणना के दौरान पूरी ईमानदारी से सही जानकारी दें
अपनी मातृभाषा “छत्तीसगढ़ी” ही बताएं, न कि हिंदी
परिवार के सभी सदस्यों की भाषा भी सही दर्ज कराएं
अपनी संस्कृति और पहचान को मजबूत बनाने में सहयोग करें
यह जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी पहचान को दर्ज कराने का एक बड़ा अवसर है। अगर इस बार प्रदेशवासी जागरूक होकर सही जानकारी देंगे, तो छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान मिल सकेगी।




