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एसआईआर को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप, कवर्धा में 67 हजार मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा



कवर्धा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कवर्धा जिला कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दावा किया कि एसआईआर के दौरान कवर्धा जिले में करीब 67 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। कांग्रेस ने इसे गंभीर विषय बताते हुए प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं, जो संबंधित समय पर अपने निवास स्थान पर मौजूद नहीं थे। कांग्रेस का कहना है कि किसी मतदाता का किसी समय घर पर अनुपस्थित मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह व्यक्ति उस स्थान का निवासी नहीं है या उसका मतदाता सूची में नाम नहीं होना चाहिए।
जायसवाल ने कहा कि नौकरी, रोजगार, शिक्षा, बीमारी, पारिवारिक कार्य या अन्य कारणों से कई लोग कुछ समय के लिए अपने गांव या निवास स्थान से बाहर रह सकते हैं। ऐसे में केवल अनुपस्थिति के आधार पर मतदाता सूची से नाम हटाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में उचित सत्यापन किया जाना चाहिए और पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में बनाए रखने अथवा दोबारा शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने दावा किया कि कवर्धा में करीब 67 हजार मतदाताओं के नाम काटे जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने निर्वाचन विभाग से मांग की कि नाम हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन कारणों से किन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। साथ ही प्रभावित लोगों को आपत्ति दर्ज कराने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दिया जाए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि का सीधा असर आगामी चुनावों में मतदान प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है।
कांग्रेस ने प्रशासन और निर्वाचन विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए नाम काटे जाने की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर पाया जाता है तो उसका नाम नियमानुसार पुनः जोड़ा जाना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो।

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