सरोदा बांध पर्यटन स्थल की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल, गार्डन के बगल में चिकन दुकानें और ढाबे बने परेशानी का कारण


परिवारों और पर्यटकों ने उठाई कार्रवाई की मांग, पर्यटन स्थल की गरिमा पर लग रहा दाग
कवर्धा। जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सरोदा बांध इन दिनों अव्यवस्थाओं और अनियोजित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण सवालों के घेरे में है। प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और पारिवारिक पर्यटन के लिए पहचाने जाने वाले इस स्थल की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। सरोदा बांध के नीचे स्थित गार्डन क्षेत्र के समीप संचालित चिकन दुकानों, ढाबों और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों को लेकर पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार गार्डन क्षेत्र बच्चों, महिलाओं और परिवारों के घूमने-फिरने तथा पिकनिक मनाने का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन इसी स्थान के आसपास चिकन बिक्री और ढाबों के संचालन से पर्यटन स्थल का माहौल प्रभावित हो रहा है। पर्यटकों का कहना है कि जिस स्थान पर परिवार सुकून और स्वच्छ वातावरण की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां इस प्रकार की गतिविधियां पर्यटन की मूल भावना के विपरीत दिखाई देती हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पर्यटन स्थल की सुंदरता और स्वच्छता बनाए रखने के बजाय संबंधित विभागों द्वारा अनदेखी की जा रही है। लोगों का कहना है कि गार्डन के ठीक बगल में इस प्रकार की दुकानों को संचालित होने देना कई सवाल खड़े करता है। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या इन दुकानों और ढाबों के संचालन के लिए आवश्यक अनुमति, स्वच्छता मानकों और अन्य नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
पर्यटकों का आरोप है कि सरोदा बांध के विकास के नाम पर समय-समय पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती नजर आ रही हैं। गार्डन क्षेत्र में निगरानी की कमी, साफ-सफाई की अनदेखी और अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पर्यटन स्थल की छवि धूमिल हो रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो सरोदा बांध अपनी पहचान एक स्वच्छ और पारिवारिक पर्यटन स्थल के रूप में खो सकता है। इससे जिले की पर्यटन छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने प्रशासन से मांग की है कि सरोदा बांध क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, गार्डन के आसपास संचालित दुकानों एवं ढाबों की जांच की जाए और पर्यटन स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि पर्यटकों की लगातार बढ़ रही शिकायतों और बिगड़ती व्यवस्थाओं पर जिम्मेदार अधिकारी कब संज्ञान लेंगे और सरोदा बांध को उसकी मूल पहचान वापस दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाएंगे?




